उस वक़्त, चार साल पहले भूली मानो सारी घटनाए इस वक़्त मेरे जहन में खून की तरह दौड़ने लगी। आज अचानक ही मेरा अती…

उसी दिन मेने उसे उसके गाँव अपने पापा के पास भेज दिया.. इसी दौरान यहाँ दिल्ही में, में ओर संजु दिल्ही…

वो कोन थी, उसने जानवी को क्यु डराया.. उसका मुझसे क्या वास्ता.. में ख्यालो में खोया था की संजु का मेसेज आया। …

अगले दिन सुबह में जानवी से चेट कर रहा था की तभी उसका मेसेज आया, मेने मेसेज सिन किया उसने लिखा था, तुम्हारी…

साथ ही हवावो ने अपना रुख बदला ओर उन हवावो में सरो के गाने की वो दर्दभरी आवाज लहराई.. …

इधर पूरी संजीवनी हॉस्पिटल को कुछ गुंडो ने घेर के रखा था। हॉस्पिटल केे सेकेंड फ्लोर पर सात नंबर का कमरा था…

वीरा को बुलाने के लिए वो आधी रात को वो अपनी सुरीली आवाज में वही दर्दभरा गाना वो गाकर नाचती.. …
