वो कोन थी, उसने जानवी को क्यु डराया.. उसका मुझसे क्या वास्ता.. में ख्यालो में खोया था की संजु का मेसेज आया। 
तुम्हारी संजु : हाय, रोमियो क्या कर रहे हो..?
        मेने उसे कल रात जानवी के साथ जो कुछ हुवा सब बताया, पर उसने बात को ज्यादा सीरियस नही लिया,
तुम्हारी संजु : यार ऐसा भी हो सकता है की ये सब उसके मन का एक वहम हो.. या फिर उसने ये सब अपने सपने में देखा हो ओर इसी वज़ह से वो डर गई हो।
          मुझे भी उसकी बात सही लगी, क्योकि में भी ये भूतप्रेत की बातो में नही मानता था। मुझे जानवी की बहुत फिकर होने लगी इसीलिए में जानवी को उसके घर पर अकेला ना छोड़कर उसे अपने घर पर लाया। जिससे वो हर वक़्त मेरे आसपास रहे। 
          उसके बाद जानवी मेरे साथ मेरे ही घर में रहने लगी। वो मेरे यहां रहने आई उस बात को एक हप्ता बीत गया इस दौरान ऐसा कुछ भी नही हुवा जैसा उसने मुझे उस वक़्त उसके घर पर बताया था। सो में थोड़ा रिलेक्स हो गया मुझे लगा संजु ठीक कहे रही थी वो सब जानवी के मन का वहम ही था।
          इस एक हप्ते में ही में ओर संजु एकदूसरे के काफी करीब आ गए। हम घण्टो एक दूसरे से वीडियो कॉलिंग पर बात करते, देर रात तले चेटिंग पर गप्पे लगाते.. पहलीबार जब विडियोकोल पर उसने अपना चेहरा दिखाया उसी पल से, उसी लम्हे से में में उसकी ओर आकर्षित हुवा.. मुजे उसकी ना ये वर्च्युअल कम्पनी बहोत पसंद थी। उससे बाते करते ऐसा लगता था की उसका ओर मेरा कोई पुराना सा रिश्ता हो..
          एक रात को जानवी सो गई ओर में देर रात तले चाहत से चेट करता रहा। आधी रात को हमने बातो पर मानो फुलस्टॉप लगाया.. नींद जो आ रही थी। में वही सोफे पर सो गया। अभी नींद को आये कुछ घण्टे भी नही हुए थे की तभी किसी की रोने की आवाज आई। मेंने जागकर लाइट्स ऑन की तो..
          वही उसी रात वाला पल, जानवी के कमरे की तरह ही मेरा कमरा भी पूरी तरह जैसे तैसे अस्तव्यस्त बिखरा पड़ा था। सारी चीजे मानो टूटी फूटी इधर उधर बिखरी पड़ी थी ओर सामने की दीवार पर ही कुछ ऊपर की ओर खून का एक बहोत बड़ा धब्बा था। उसके नीचे ही फर्स पर खून से लथपथ हालत में जानवी बेहोश पड़ी थी। 
          मानो किसी ने उसे उठाकर जोर से उस दीवार पर पटका हो।
                        * * *
          हॉस्पिटल में जब जानवी को होश आया तब वो काफी डरी हुई थी। उसकी आँखों में मानो वो डर साफ झलक रहा था। में उसके सामने था। मेने उससे पूछा,
          "जानवी.. जानवी बतावो क्या हुवा.." 
          उस वक़्त वो कुछ बोल तो ना सकी पर उसने डर के मारे मेरी ओर अपनी एक उंगली उठाई। 
          में कुछ समझ पाउ इसे पहले ही मेरा ध्यान सामने जानवी के बेड के पीछे वाले पारदर्शक शीशे में गया। वहां, उस शीशे में कुछ ऐसा देखा जिस पर यकीन करना मुस्किल था। वहां उस शीशे में मेने एकदम अपने पीछे खड़ी एक धुंधली अस्पष्ट मानव आकृति का प्रतिबिंब देखा। 
          जानवी का इशारा मेरी ओर नही पर मेरे पीछे खड़ी उस अस्पस्ट आकृति की ओर था। उसे देखने के लिए में अचानक ही पीछे की ओर मुड़ा पर वह कोई नही था। 
          अब उस आकृति को देखने के बाद तो मुझे भी लगने लगा की जानवी सही कह रही थी कुछ तो अजीब है। उसके आसपास कोई तो ऐसी शक्ति है जो उसे बारबार परेशान करे जा रही है। वो। मेरी दोस्त है। मुझे किसी भी हाल में उसे इन सब से बचना होगा। 
          में ख्यालो में खोया हुवा हॉस्पिटल की कॉरिडोर में बैठा था की तभी संजु का मेसेज आया। 
तुम्हारी संजु : हाय रोमियो किन ख्यालो में खोये हो। 
          मेने आज अभी कुछ घण्टे पहले हॉस्पिटल में, जानवी के कमरे में जो कुछ भी देखा वो सब उसे बताया। पर उसने बात की गंभीरता को जाने बिना बात को मजाक में लेली। 
तुम्हारी संजु : मुजे लगता है की तुम ओर जानवी दोनो सेम हो। दोनो को आजकल एक जैसे ही वहम हो रहा है। 
में : ये वहम नही है। में सच कह रहा हु। मेने वाकई में एक आत्मा जैसी धुंधली सी आकृति शीशे में मेरे पीछे खड़ी देखी है। 
          इसबार उसने बात को बदलते हुवे कहा,
तुम्हारी संजु : यार वीर प्लीज़.. ये भूतप्रेत की बात छोड़ो.. मुजे डर लगता है इनसब से। 
          उसकी इस बात से में उसपर हँसा,
में : अरे क्या बात है। सबको डराने वाली आज खुद डर रही है। 
तुम्हारी संजु : तुम्हे सच में लगता है की मुजे देखकर भी कोई डर जाएगा। 
में : किसी ओर का तो पता नही पर मुझे तुमसे डर लगता है। 
तुम्हारी : मतलब तुम कहना क्या चाहते हो की में इतनी खराब दिखती हु। 
में : बात को संभलते हुवे, नही यार तुम तो..
        में मेसेज टाइप ही कर रहा था की उसने बात को बदलते हुवे कहा,
तुम्हारी संजु : छोड़ो वो सब ये बतावो की में तुम्हे केसी लगती हु। 
        उसने अचानक ही पूछ लिया की में तुम्हे केसी लगती हु जवाब में मेरे दिल से भी बात निकल ही गई। 
में : तुम मुझे बहोत अच्छी लगती हो। 
तुम्हारी संजु : सच में..?
में : सच में यार मजाक नही कर रहा.. तुम्हे जब पहलीबार देखा ना तब से ही में तुम्हे पसंद करने लगा था। 
तुम्हारी संजु : तो फिर शादी करोगे मुझसे..?
        उसने सीधे ही शादी की बात की, मेने कहा,
में : हा, पर अभी नही। कॉलेज में मेरा लास्ट यर है। खतम होते ही हम शादी कर लेंगे। 
तुम्हारी संजु : ओके, तो तबतक में उस दिन की प्रतीक्षा करूंगी। 
                         * * *
         जानवी के साथ इस एक ही वीक में दो अजीब से हादसे हो गए। ओर तो ओर होस्पिटल के उस शीशे में दिखे अजीब साए ने तो मानो मेरी नींद ही हराम कर दी। मुझे जानवी की बहुत फिकर होने लगी कही इस सब अजीब घटनाओ के चलते उसे कुछ हो गया तो..?
         इस बारे में मेने अपने बेस्टफ्रेंड परेश मकवाना से बात की, क्योंकि एक मात्र वही बंदा था जो हर समस्या का समाधान जानता था। मेने उससे इन सब से बारे में विस्तार से बात की, 
         पहले तो संजु की तरह उसने भी इस बात को मजाक ही समजा फिर बात की गंभीरता को जानते हुवे उसने मुझसे कहा,
          "समझ गया, में सब समझ गया की ये आत्मा जानवी के पीछे क्यु पड़ी है।" 
          उसकी बातो का मतलब जानने के लिए मेने ऐसे ही असमंज में उससे पूछा,
          "कोन है वो.. ओर जानवी के पीछे क्यों पड़ी है ?" 
          उसने अपनी बात रखते हुवे कहा,
          "तुम्हारे लिए.. कोई तो ऐसी वज़ह है की वो नही चाहती की तुम ओर जानवी साथ में रहो.."
          "पर मुझसे उसकी क्या दुश्मनी..? ओर जानवी ने उसका क्या बिगड़ा है ?"
          "ये तो में नही जानता पर इतना जरूर जानता हु की वो तुम्हारे लिए आई है। वो नही चाहती की उसके अलावा तुम्हारी जिंदगी में कोई ओर लड़की आये शायद इसीलिए उसने जानवी पर दो बार हमला भी किया होगा.. मेरे ख्याल से तुम्हे जानवी से दूरी बनानी होगी.. अगर तुम जानवी के करीब रहोगे तो वो जानवी को मार देगी.."
          "दूरी बनानी होगी..! अरे वो मेरी दोस्त है। उसकी जान को खतरा है। में उससे कैसे दूर रहे शकता हु अगर उसे कुछ हो गया तो..?"
           उसने मुझे समजाते हुवे कहा,
           "देखो दोस्त जानवी को बचाने के लिए तुम्हे उससे थोड़ी दूरी रखनी ही होगी.. अगर आज उससे दूर नही हुए तो कल वो शायद उसे मार भी दे.."
           परेश की बात मानने के अलावा मेरे पास ओर कोई रास्ता भी तो नही था। परेश के बताने के मुताबिक अगर वो मेरे लिए ही आई है तो में अपनी वजह से जानवी की जिंदगी तो खतरे में नही डाल शकता ना..
क्रमशः