अगले दिन सुबह में जानवी से चेट कर रहा था की तभी उसका मेसेज आया, मेने मेसेज सिन किया उसने लिखा था, 
तुम्हारी संजु : सोरी वीर, मुजे कल तुम पर यु चिल्लाना नही चाहिए था। प्लीज़ मुझे माफ कर दो। 
         केसी लड़की है ये कल गुस्से में मुझपर चढ़ बैठी ओर आज.. पर सच कहु लड़कियों के मुह से सोरी बहोत कम सुनने को मिलता है। 
में : ओके, यार जाने दो सब.. 
         वो भी मेरी तरह एकदम फ्रेंडली हो गई..
तुम्हारी संजु : क्या कर रहे हो..?
में : कुछ खास नही अपनी गर्लफ्रेंड से चेट कर रहा था। 
         उसने हैरानी से पूछा,
तुम्हारी संजु : तुम्हारी गर्लफ्रेंड, कोन है वो.. मुझसे भी मिलवावो..
में : जानवी नाम है उसका, यही दिल्ली में रहती है। हम साथ ही कॉलेज में पढ़ते है। 
तुम्हारी संजु : वो बहुत सुंदर होगी नही..!
में : हा पर तुम्हारे जीतनी नही.. तुम से तो कम सुंदर है।      
          सच कहु तो लड़कियों को अपनी तारीफ सुनना बोहत पसंद है। 
तुम्हारी संजु : मुझे उसकी तसवीरे दिखावोगे। मुझे देखना है उसे..
        अब वो जानवी को अपने साथ कम्पेर करेगी उसे खूबसूरत बोलकर, उसकी बेवजह तारीफे करकर कही मे उसे कोई चुना तो नही लगा रहा ना.. 
में : क्यु नही.. रुको अभी सेंड करता हु। 
          ओर फिर मेने हमदोनो के कुछ रोमाटिंक पोज़िस वाले कपल फोटोग्राफ्स भेज दिए। वही फोटो जब हम साथ में आगरा गए थे। ताजमहल की खूबसूरती देखने। 
         में ओर जानवी एक ही कॉलेज में साथ में पढ़ते थे। हमारे बीच पक्की यारी होने के नाते हमदोनो दिनभर काफी वक़्त साथ में जुजारते थे। उसे मे पसंद था पर में उसे सिर्फ अपनी एक अच्छी दोस्त ही मानता आया था। उसे ना घूमना फिरना बहोत अच्छा लगता जब भी मौका मिलता मेरे साथ जहा मन चाहे निकल जाती थी.. कभी दिल्ही की सड़को पर, तो कभी ताजमहल की गलियारों में,
        हमदोनो की मेरी भेजी तसवीरें देखकर उसने कहा,
तुम्हारी संजु : बहुत अच्छी जोड़ी है तुम्हारी..
में : हा वो तो है। तुम्हे पता है हमारी पूरी कॉलेज हमे रोमियो जूलियट कहकर ही बुलाती है। 
          उसके बाद जानवी तो ऑफलाइन हो गई पर में संजु से दोपहर लंच टाइम तक चेट करता रहा। 
        संजु से दिनभर बाते करने के बाद उसके अगले दिन, सुबह आठ बजे के आसपास में बाइक लेकर जानवी को पिक करने उसके घर पहोचा
        उसके घर के गेट के पास ही बाइक खड़ी करकर मेने उसे बुलाने के लिए दो चार हॉर्न बजाए। पर उसने कोई जवाब ही नही दिया। रोज तो ऊपर बालकनी में से ही कह देती थी, 
        "वीर, बस पांच मिनिट में आई.."
        पर आज.. आज उसकी ऐसी कोई प्रतिक्रिया नही थी। सो मेने उसे फोन लगाया, उसका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा था। 
        इसका फोन क्यु नही लग रहा.. कही कुछ.. मेरे मन में कुछ अजीब सा डर बैठ गया। 
  
           बाइक स्टैंड पर लगाकर गेट खोलकर में उसके घर गया, दरवाजा पहले से ही खुल्ला था। में अंदर गया। 
           "जानवी.. जानवी.. कहा तुम.." मेने उससे दो चार आवाजे भी लगाई पर उसने उसका कोई प्रतिउत्तर नही दिया। 
          सीढ़िया चढ़कर में ऊपर उसके कमरे में गया, कमरे का दरवाजा भी थोड़ा सा खुल्ला था। 
         दरवाजा खोलकर में अंदर पहुचा तो पूरा कमरा जैसे तैसे अस्तव्यस्त बिखरा पड़ा था। सारी की सारी चीजे भी कमरे में इधर उधर बिखरी पड़ी थी। ओर वो.. डरी सहमी सी एक कोने में छुपकर बैठी थी। 
         में उसके पास दौड़ा..
         "जानवी.. जानवी क्या हुवा.. तुम इतनी डरी हुई क्यु हो.."
         उसने डरके मारे कांपते हुवे मेरी ओर देखा, सामने मुझे देखकर वो मुजसे लिपट कर रोने लगी। 
         उसने बताया की कल रात उसके साथ इस कमरे में क्या हुवा था। 
         "कल रात तुमसे बात करकर में बालकनी में कमरे में सोने आई, बेड पर लेटकर मेने लाइट्स ऑफ की अभी आंखे बंध हवे कुछ ही पल हुए की मुझे किसीकी आवाज सुनाई दी। किसी लड़की की पायल की झनकार.. ऐसा लगा जैसे बहार कोई सीढिया चढ़कर ऊपर कमरे की ओर आ रहा है। 
         डर की मारी में जाग उठी.. आवाज बहार से ही आ रही थी इसीलिए मेने जोर से पूछा..
         "कोन है... कोन है वहां..?"
         पर किसीने कोई जवाब ही नही दिया.. इसीलिए थोड़ी हिमत जुटाकर में बहार कोन है ये देखने के लिए कमरे से बहार निकली.. बहार आकर देखा तो मेरे अलावा होल में कोई नही था। फिर वो आवाजे...
         डर के मारे में अपने कमरे में वापस आई.. ओर सोने ही जा रही थी की, तभी मेरी नजर सामने रखे ड्रेसिंग के आईने पर गई.. 
         उसमे एक चहेरा था एक लड़की का बेहद भयानक चहेरा.. उसे देखते ही में डर के मारे बाहर की ओर भागी.. पर जैसी में दरवाजे पर पहुची दरवाजा खोलकर बहार की ओर भागु इसे पहले ही दरवाजा अंदर से अपने आप बंध हो गया..
         ओर फिर उस लड़की की भयानक रोने की आवाज़ मानो कमरे में गूंज ने लगी..
         में बहुत ही डर गई.. इसीलिए तुम्हे कोल करने के लिए मेने अपना मोबाइल हाथ में लिया.. 
         में तुम्हे कोल लगा ही रही थी की वो लड़की आईने से निकलकर एकदम मेरे सामने आ गई.
         हवा में लहराते बिखरे बाल, श्वेत सी लालशयुक्त आंखे, बेहद भयानक चहेरा, लंबे नाखून.. उसे देखते ही में डर के मारे जोर से चिंखी..
         उसने मेरा गला दबोचा ओर फिर एक हाथ से मुझे हवा में उठाया..
         "वीर सिर्फ मेरा है.." 
        ओर इतना बोलते ही वो मेरी नजरों से हवा में कही ओझल हो गई.. अचानक ही में नीचे गिरी.."
                        * * *
क्रमशः