काले घने अंधेरे में ऊंचे से बड़े बड़े पेड़ो से घिरे उस सुमसाम जंगल के बीच बनी एक पगडंडी पर एक लड़की दौड़ती हुई भागी जा रही थी। भागने की वजह से उसकी साँसे फूल सी गई थी। वो काफी थक सी गई थी। अब उससे आगे दौड़ा नही जा रहा था।
पर उसे भागाना था, अपनी जान बचानी थी। उस इंसानी भेड़िये से जो उसके पीछे पड़ा था। जिसने उसके एक दोस्त को पहले ही बुरी तरह से मार दिया था।
जंगलो में बनी जाड़ियो से होते हुवे वो नदी के पानी में दौड़ने लगी। पानी में कुछ आगे चली थी। की पीछे से एक भयानक आवाज आई।
उस भेड़िये की ख़ौफ़नाक दहाड़.. जो उस घने जंगल में गूंज उठी..
उसने डर में मारे मुड़ के पीछे की ओर देखा तो उसकी आंखे फ़टी फ़टी रह गई.. उसकी आंखों में सामने खड़े एक भेड़िए का वो खोफ साफ दिख रहा था।
ठीक उसके सामने नदी के उस पार एक काला भेड़िया इंसानों की तरह अपने पैरो पर खड़ा था।
डर के मारे वो लड़की जोर से चिल्लाई.. पर उसकी चींख उस जंगल में दब सी गई। एक बड़ी सी दहाड़ के साथ भेड़िया कूदकर उस पर झपटा
कुछ ही देर में उसके शरीर के चिथड़े चिथड़े उड़ गए... वही पानी में बैठकर वो भेड़िया जानवरो की तरह उस के मास को दोनों हाथो से खाने लगा।
***
इस कहानी की शरुआत होती है। एक ख़ौफ़नाक जंगल से जहां पर एक इंसानी भेड़िया का काफी आतंक था। रात के बारा बजे काली रात में वो इंसानी भेड़िया जंगल में घूमता था। ओर जंगल में जो मिले उसे मारकर खा जाता था।
उस जंगल के आसपास रहनेवाले लोग भी भेड़िये के खोफ से रात होते ही अपने अपने घरों में कैद हो जाते थे। शहर से जंगल की ओर जाते एक मुख्य रास्ते पर वहा के स्थानिक लोगो ने स्पस्ट शब्दो में एक चेतावनी मारी थी।
खूंखार इंसानी भेड़िये से सावधान, रात को जंगल में ना जाए।
***
कॉलेज के तीन पक्के दोस्त, स्वीटी निकुंज ओर विनीत। हमेशा से एडवेंचर में मानने वाले वो तीनो एडवेंचर के नाम पर इस बार कुछ खास करना चहते थे। स्वीटी को इंटरनेट से एक भयानक जंगल ओर जंगल में इंसानी भेड़िये के खोफ के बारे में कुछ जानकारी मिली, उसने ठान ली की में वहां जाऊंगी। इस बारे में उसने अपने दोनों दोस्तो को बताया। उसकी तरह एडवेंचर के लिए पूरा पागल विनीत तो उसके साथ जंगल जाने को तैयार भी हो गया पर निकुंज उसने आने से साफ मना कर दिया।
सोरी गायज़ ये बहोत ही खतरनाक होगा। मुझे नही आना
स्वीटी ने विनीत की ओर देखा। विनीत ने उसे समजाते हुवे कहा,
अरे पागल, तुझे हमारे साथ आना ही होगा नही आया तो तुझे हमारी दोस्ती का वास्ता..
पर ये... निकुंज कुछ बोले इसे पहले ही स्वीटी ने उसकी बात काटते हुवे कहा,
तु आएगा या नही..?
ठीक है। मरो सब..
विनीत ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुवे कहा,
नीकु तु इतना नेगेटिव ओर डरपोक क्यु है। अरे हम एडवेंचर्स ग्रुप के मेंम्बर है। डर के साथ तो हम रोज डील करते है।
उसकी बात पर स्वीटी मुस्कुराई।
सही कह रहे हो। तो बोलो कब निकलना है।
विनीत ने डील डन करते हुवे कहा,
आज शाम सात बजे..
उसकी बात पर आपत्ति जताते हुए निकुंज बोल पड़ा.
क्या..? रात को जाऐंगे..?
स्वीटी ने उसकी ओर मुस्कुराते हुवे कहा,
हा नीकु रात को जाएंगे।
गायज़ मुझे नही आना तुम लोगो के साथ,
विनीत इरिटेट होते हुवे कहा,
क्या यार इसके नाटक ठीक है। कोई कही नही जाएगा। फिर स्वीटी की ओर देखते हुवे कहा,
कल इस का बर्थडे है। हम लोग इसकी विश भी पूरी नही कर शकते।
निकुंज ने स्वीटी की ओर देखा।
स्वीटी ने निकुंज से कहा,
हा यार, में चाहती हु की मेरे इस बर्थडे पर हम कुछ नया करे... जैसा की पिछली बार किया था। याद है तुम्हे हम तीनो ने उस बंगले से भूत को भगाया था।
निकुंज ने मुस्कुराते हुवे कहा,
हा ओर वो भी याद है। की उस भूतनी के चक्कर में मेरा पैर भी टूटा था।
विनीत ने कहा,
साले पैर को छोड़ मजा आया था या नही..?
निकुंज ने कहा
हा बहोत.. हमारी वजह से उस भूतनी को बरसो बाद मुक्ति मिली इसे अच्छा ओर क्या होगा।
स्वीटी ने उन दोनों की ओर देखते हुवे अपनी फिलोसोफी की बुक खोलते हुवे कहा,
गायज़ ये जिंदगी ना हमे एकबार मिलती है। क्यु ना हम इसे खुलकर जी ले।
उसकी बात सुनकर विनीत ने कहा,
कोई आये ना आए स्वीटी पर तुम्हारे साथ एडवेंचर ट्रिप में, में जरूर आऊँगा।
निकुंज ने कहा,
ओर में भी आऊंगा।
स्वीटी ने उन दोनों को गले लगाया।
पागलो तुम दोनों के अलावा मेरा ओर है ही कोन आज शाम को निकलते है। हमारी नई एडवेंचर ट्रिप में।
***
दूसरी ओर उसी जंगल के बीच एक फारेस्ट ऑफिसर का टेंट था। जहां पर एक ही आदमी रहता था। नाम था वीरसिंह।
उसका एक ही काम था। उस खूंखार भेड़िये को मारकर उस जंगल के खोफ को खतम करना इसीलिए वो दो तीन सालो से उस जंगल में डेरा बनाये बैठा था। पर कभी भेड़िया उसके हाथ आया ही नही। रोज सुबह जंगल की शेर के दौरान उसे किसी ना किसी की लाश के टुकड़े मिलते थे। उस भेड़िये के आतंक से उसे आसपास के गाँववालो को बचाना था पर कैसे..?
वो सोच ही रहा था। की उसका फोन बजा। उसने नंबर देखा तो कोल उसकी बीवी मंजु का था।
उसने कोल काट दिया। ओर आराम से चेर पर बेठेते हुवे रात होने का इंतजार करने लगा।
उस जंगल के आसपास के लोगो को उम्मीद थी। की अफसर साब एक न एक दिन भेड़िये को मारकर जंगल को उसके ख़ौफ़नाक साये से आजाद करेंगे। इसिलए वो लोग अफ़सर को बड़ा मानते थे। उनके लिए रोज़ सुबह शाम खाने की व्यवस्था भी वही लोग करते थे।
वीर भी उन लोगो को अपना मानता था। उन लोगो को इस आतंक से बचाने के लिए ही वो यहां पर आया था।
***
विनीत स्वीटी ओर निकुंज अपना अपना कुछ जरूरी सामन के साथ लेकर एक ओपन जीप में निकल गए अपनी अगली ट्रिप के लिए। पर उन्हें पता नही था की वो ट्रिप उनकी आखरी ट्रिप होगी। दूसरी ओर अपनी ओपन जीप में वीर भी उस भेड़िये को मारने के लिए घने जंगल की ओर ही जा रहा था।
धीरे धीरे रात हो गई रात का काला घनघोर अंधेरा ओर पशु पक्षियो की भयानक चीखे जंगल के वातावरण को ओर डरावना बना रही था। गाड़ी चलाते विनीत के पास बैठे निकुंज के डर के मारे पसीने छूट रहे थे। गाड़ी चलाता विनीत ओर पीछे बैठी स्वीटी दोनों इस भयानक वातावरण के भय को भी काफी इंन्जोय कर रहे थे।
धीरे धीरे अंधेरे के साथ जंगल का बढाता जाता खोफ देखकर निकुंज को बहोत डर लग रहा था। गाड़ी कुछ आगे चली थी की जंगल की ओर जाते रास्ते के बहार लगे एक बोर्ड पर निकुंज की नजर पड़ी।
उसने उस बोर्ड की ओर इशारा करते हुए डर के मारे उसने बोर्ड को जोर से पढा।
खूंखार इंसानी भेड़िये से सावधान, रात को जंगल में ना जाए।
विनीत ओर स्वीटी ने भी वो बोर्ड देखा।,
निकुंज ने गाड़ी में पास बैठे विनीत से कहा,
विनीत, मुझे ये जगह ठीक नही लग रही है। हमे यहां से निकलना चाहिए।
स्वीटी ने हँसते हुवे कहा,
डर मत फट्टू हम है तेरे साथ।
उसके बात पर विनीत ने भी कहा,
सुन भाई कुछ नही है यहां.., अगर होगा भी तो हम निपट लेंगे।
उसकी बात पर वैसे ही डरते हुवे निकुंज ने चारो ओर नजर घुमाई। उसकी आंखों में जंगल का खोफ साफ दिख रहा था।
विनीत ने देखा की आगे जाड़ियो वाला रास्ता है। गाड़ी अंदर नही जाएगी।
उसने गाड़ी को अचानक ब्रेक लगाया।
स्वीटी ने पूछा।
क्या हुआ..? तुमने गाड़ी क्यो रोकी..?
उसने सामने देखते हुवे कहा,
अब गाड़ी आगे नही जाएगी। आगे का रास्ता हमे पैदल ही चलना होगा।
पीछे से अपना बेग लेकर स्वीटी तैयार हो गई।
ठीक है चलते है।
विनीत उतरा, उसके साथ डर के मारे चारो ओर देखता निकुंज भी उतरा। उसने पीछे से अपना सामान वाला बेग कंधे पर टंगा।
विनीत ने स्वीटी को अपना हाथ दिया।
प्यार से उसका हाथ थामकर वो नीचे उतरी।
नीचे उतरते ही, अपनी जेब से गन निकालकर उसने निकुंज को दी।
ले फट्टू हम से ज्यादा इसकी तुजे जरूर पड़ेगी।
स्वीटी ने उसकी ओर देखते हुवे पूछा।
तु यहां गन लेकर आया है ?
विनीत ने हँसते हुवे कहा,
हा वो पापा की थी, सेफ्टी के लिए रख ली।
निकुंज गन हाथ में लेकर देख रहा।
उसने विनीत से पूछा।
भाई इसे चलाते कैसे है।
अरे एक आर्मी ऑफिसर का बेटा होकर नीकु तु गन चलाना नही जानता।
स्वीटी ने मुस्कुराते हुवे नीकु से कहा,
निकुंज ने मासूमियत से कहा,
वो पापा ने कभी दी ही नही, विनीत ने उसके हाथ से गन लेते हुवे कहा,
इसको है ना पहले निशाने पर लगाते है। फिर ये जो घोड़ा यानी ट्रिगर है ना उसे दबाते है। की गोली अपने आप छूट जाएगी।
स्वीटी ने हँसते हुवे कहा,
ओर निशाना सही से लगाना वरना..
विनीत निकुंज के हाथ में फिर से गन थमा दी।
जेब में रख कभी भी जरूरत पड़ शकती है।
निकुंज ने गन अपने जैकेट की पॉकेट में रखी। स्वीटी ने विनीत की ओर देखकर कहा,
चले..?
हा चलते है।
ओर वो तीनो आगे जंगल की ओर चलने लगते है।
***
इधर अपनी जीप लिए जंगल के रास्ते जा रहे वीरसिंह को दूर जंगल में खड़ी एक जीप दिखी। उसने वहां जाकर देखा गाड़ी का इंजिन अब भी गर्म था।
इस वक़्त यहां कोन आ शकता है। उसने इधर उधर चारो ओर देखा। वह दूर दूर तक जंगल के खोफ के अलावा कोई नजर नही आ रहा था। अपनी बड़ी बंधूक कंधे पर रखते हुवे वो आगे जाती जाड़ियोवाले रास्ते पर चलने लगा।
कुछ आगे चला था की उसे नीचे जमीन पर कुछ चमकता हुवा दिखा। उसने जुककर वो चमकती चीज उठाई ओर हाथ में लेकर देखा। वो किसी लड़की के कान की एक बाली थी।
औरत की बाली, औरत यहां क्या कर रही है। वो उस बाली को देख ही रहा था की तभी उसे किसी लड़की की भयानक चीख सुनाई दी।
आ...आ...
लगता है किसी की जान को खतरा है। मुझे जाना होगा। ओर वो आवाज की दिशा में भागा।
***
अचानक ही विनीत ओर निकुंज से थोड़ा आगे की ओर चल रही स्वीटी की चींख सुनकर वो दोनों दौड़कर उसके पास पहोचे।
निकुंज ने डर के मारे आसपास चारो ओर देखा वहां कोई नही था। विनीत ने स्वीटी से पूछा
क्या हुवा तुम चीखी क्यो..?
स्वीटी उन दोनों की ओर जोर जोर से हँसी
डर गए ना तुम दोनों अरे बारा बज गए आज मेरा जन्म दिन है। सो में चींखकर इस जंगल को बता रही थी।
निकुंज ने उसकी ओर हैरानी से देखा
इस तरह कोन चीखता है।
स्वीटी ने कहा में, फिर उनदोनो की ओर देखकर कहा,
चलो अब तुम दोनों मुझे हैप्पी बर्थडे विश करो..
ठीक है करते है।
उस ख़ौफ़नाक जंगल के बीचो बीच वो तीनो अपना बर्थडे मना रहे थे।
हैप्पी बर्थडे स्वीटी.. हैप्पी बर्थडे स्वीटी.. हैप्पी बर्थडे डियर स्वीटी..
वो दोनों उसे विश कर रहे थे की तभी जंगल में से एक भेड़िये की भयानक दहाड़ सुनाई दी।
वो तीनो डर के मारे कांप उठे।
निकुंज ने कहा,
गायज़ इंसानी भेड़िया, हमे जल्द से जल्द यहां से निकलना चाहिए।
स्वीटी ने उसकी बात मानते हुवे डर के मारे कहा,
नीकु ठीक कह रहा है। हम निकलते है यहां से..
स्वीटी निकुंज ओर विनीत तीनो वहां से निकल ही रहे थे। की तभी पीछे से किसीने उन तीनो पर हमला किया।
विनीत की एक भयानक चींख के साथ भेड़िये की दहाड़
डर के मारे वो दोनों पीछे की ओर मुड़े तो अपने पैरो पर खड़े एक बड़े से खूंखार भेडिये ने विनीत का एक पैर पकड़ लिया था।
उसे देखकर वो डर के मारे चिल्लाये..
आआ...आ.आ..
स्वीटी ने निकुंज से कहा, निकुंज गन निकालो पर डर के मारे वो कुछ करने के काबिल नही था।
उधर भेडिए की पकड़ में फसा विनीत उन दोनों को भागने के लिए कह रहा था।
स्वीटी.., नीकु भाग जाओ.. अपनी जान बचावो..
स्वीटी विनीत को बचाने के लिए भेड़िये की ओर आगे बढ़ी की निकुंज ने उसे पीछे खिंचा।
स्वीटी.. चलो.. स्वीटी भागते है।
विनीत भी उन दोनों से यही कह रहा था।
भागो.. अपनी जान बचाने के लिए तुम दोनों भाग जाओ..
स्वीटी ओर निकुंज की आंखों के सामने उस भेडिये ने विनीत को फाड़ डाला।
ये देखकर स्वीटी ओर विनीत आगे जंगल की ओर भागे।
ऊपर आश्मान की ओर एक बड़ी ख़ौफ़नाक दहाड़ मारकर वो भेड़िया उन दोनों की पीछे भागा।
आगे चलकर भेडिए का रास्ता भटकाने के लिए उन दोनों ने अलग अलग राह चुनी।
नीकु तु इस तरफ जा, में इस तरफ जाती हु।
ठीक है। पर अपना ख्याल रखना।
तुम भी अपना ख्याल रखना।
ओर स्वीटी नदी की ओर भागी ओर निकुंज दूसरे रास्ते यानी पहाड़ीयो की ओर.. धीरे धीरे समय बित रहा था।
***
अपनी जान बचाने के लिए स्वीटी आगे की ओर भागे जा रही थी। ठीक उसके पीछे कुछ कदम की दूरी पर एक आदमखोर भेड़िया पड़ा था।
भागते भागते उसकी साँसे फूल सी गई। उसे लगा की अब वो नही बचनेवाली ये भेड़िया उसे भी अपने दोस्त विनीत की तरह मार देगा। फिर भी बचने की उम्मीद में वो आगे घने जंगल की ओर भागती रही।
इधर पहाड़ीयो की ओर भाग रहे निकुंज ने अपनी घड़ी में समय देखा।
3.39 मिनिट हुई थी। उसे अपनी दोस्त स्वीटी की फिकर होने लगी।
पता नही स्वीटी किस हाल में होगी। में विनीत को तो नही बचा शका पर मुझे स्वीटी को बचाने के लिए मुझे कुछ करना ही होगा पर क्या..?
वो नदी के रास्ते गई थी। मुझे भी वही जाना चाहिए।
स्वीटी को बचाने के लिए वो भी नदी के रास्ते भागा कुछ आगे की ओर गया था। की उसे स्वीटी की एक भयानक चींख सुनाई दी।
वो काफी हद तक डर गया। जिस दिशा से आवाज आई वो उस दिशा में भागा।
सामने ही एक बड़ी नदी थी। दौड़ते हुवे वो वहां पर नदी के पानी में पहुचा तो वहां पर पानी में स्वीटी के कुछ लोहिलुहन कपड़े के टुकड़े ओर उसके शरीर के माँस के कुछ टुकड़े पानी में तेर रहे थे।
स्वीटी की ये हालत देखकर वो एकदम से डर गया। उस आदमखोर भेड़िये की वजह से उसने पहले अपने दोस्त विनीत ओर अब स्वीटी को भी खो दिया। उसे बहोत गुस्सा आया।
उसने जेब से अपनी गन निकाली।
की तभी काली रात एक नई सुबह में तब्दील हो गई। धीरे धीरे सवेरा खुल रहा था।
गन की पोज़िशन बनाये वो जंगल के बीच इधर उधर देख रहा था। की तभी पीछे से एक दहाड़ आई।
वो अचानक पीछे की ओर मुड़ा तो उसकी आंखे फ़टी की फ़टी रह गई। उसने सामने कुछ ऐसा जिसपर यकीन करना काफी मुश्किल था।
उसने देखा की, नदी के उस पार खड़ा वो भेड़िया धीरे धीरे एक आदमी में बदल रहा था।
सुबह की पहली किरण जैसे ही उस भेड़िये पर पड़ी की वो पूरी तरह से एक आदमी में बदल गया।
वीरसिंह, वो इंसानी भेड़िया ओर कोई नही उस जंगल का रक्षक वीरसिंह था। उसे लगा की मेरा बर्षो का राज़ नदी के सामने पानी में खड़े उस लड़के पता चल गया अब वो ये राज़ किसी को बताए उसे पहले मुझे उसे मारना होगा।
उस लड़के को मारने के लिए वो उसकी ओर आगे बढ़ा की तभी निकुंज ने उस पर गोली चलाई। गोली गलती से उसके सीने की जगह उसके कंधे पर लगी। फिर भी एक चींख के साथ वो घायल हो कर वही गिर पड़ा।
निकुंज ने तुरंत ही अपने पिता को फोन किया ओर ये सारी घटनाए बताई। उसके पिता ने तुरन्त ही अन्य फॉरेस्ट अधिकारियो को भेजकर उस इंसानी भेड़िये यानी की वीरसिंह को पकड़ लिया।
आखिर अपने दोनों दोस्तो को खोने के बाद निकुंज ने उस जंगल को उस इंसानी भेड़िये के खोफ से आजाद किया। वीरसिंह की पूछताश के दौरान सामने आया की,
वो जन्म से ही एक श्राप से पीड़ित है। रोज रात को वो एक खूंखार भेड़िये में बदल जाता है। ओर उसे अपने आप को जिंदा रखने के लिए इंसानी मांस की आवश्यकता थी।
चार साल पहले वो अपने गाँव में लोगो को मारकर खाता था। इस बात की गाँव में खबर हो गई ओर उसे गाँव निकाल दिया।
आखिर अपने राज़ को बचाने के लिए, अपनी भूख मिटाने के लिए वो इस जंगल में। आ गया। यहां उसे रोज रात को कोई न कोई मिल ही जाता था। जिसे वो अपना शिकार बनाता था।
आखिर में उसे उस भयानक श्राप से मुक्त करने के लिए सरकार ने उसे मृत्युदंड दे दिया।
समाप्त
दोस्तो, मेरी ये कहानी आपको केसी लगी इस बारे आप अपनी राय जरूर दे। ओर ऐसी ही रोमांचक कहानिया पढ़ने के लिए आज ही मुझे फॉलो कीजिए।

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Nice
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