उस दिन में अपनी खास दोस्त जानवी से वॉट्सऐप पर चेट कर रहा था। की ऊपर नोटिफिकेशन बार पर फेसबुक की एक नोटिफिकेशन आई, मेने देखा तो किसी अंजान लड़की की फ्रेंड रिक्वेट थी। नाम था तुम्हारी संजु आपको ये नाम थोड़ा अजीब लगा ना, उस वक़्त मुजे भी ये नाम बहोत अजीब लगा। पर क्या करे आजकल यही ट्रेंड चल रहा है। कोन साला अपने असली नाम से फेसबुक एकाउंट बनाता है। वो सुना है ना एंजल प्रिया, पापा की परी, क्युटिपाई, सायलेंट लवर जैसे बहोत से नाम से फेसबुक पूरा भरा पड़ा है। उनमे से कुछ तो फेक आईडी होती है। हम जिसे पापा की परी समाज रहे होते है वो हकीकत में पापा का परा निकलता है।
प्रोफ़ाइल पिक, में थी सिंड्रेला, पहले तो लगा की ये कोई फेक आईडी ही होगी। फिर भी एकबार देखने में अपने बाप का क्या जाता है। एकबार प्रोफ़ाइल में जाकर मेने उस लड़की की निजी जानकारीया देखी, जेंडर पर लिखा था फीमेल फिर मुजे राहत हुई।
हिंदी में नाम था तुम्हारी संजु , लगा साला अब ये किसीकी संजु होगी। प्रोफ़ाइल पिक थी सिंड्रेला वही सिंड्रेला जो मेरी बहन पल्लवी को बहोत अच्छी लगती थी। फ्रेंड लिस्ट पूरी हाइड थी। ओर होमटाउन तो लिखा ही नही था। रिलेशन स्टेटस सिंगल था। वैसे तो जहाँ ये सिंगल का बोर्ड लगा होता है आजकल वही सब मिंगल मिंगल चल रहा होता है।
फिर भी एक लड़की की रिक्वेस्ट थी सो मेने एक्सेप्ट कर ही ली। क्या पता सेट भी हो जाए। उस वक़्त हो ऑनलाइन ही बैठी थी। सो लगे हाथ मेने इनबॉक्स मेसेज भी कर दिया।
में : हाय चाहत,
मुजे लगा की बाकी लड़कियों की तरह वो भी भाव खाएगी। लेट रिप्लाय देगी या फिर देगी ही नही। पर उसने ऐसा कुछ ना करते हुवे फ़ौरन मुजे रिप्लाय दिया। मुजे तो डाउट हुवा कही ये कोई फेक आईडी तो नही।
उसका छोटा सा मेसेज आया,
तुम्हारी संजु : हाय,
मेने रिप्लाय किया, : आप भी मेरी तरह हिंदी हो।
अरे ये कैसा सवाल हुवा उसने हिंदी में लिखा है 'तुम्हारी सुंजु' फिर भी पूछा.. पर क्या करे हम लड़को का ना ये यूनिवर्सल प्रॉब्लम है। कोई भी बात हो एकबार पूछकर कन्फर्म तो कर ही लेते है। उसका फिर वैसा ही छोटा रिप्लाय आया,
तुम्हारी संजु : हा,
सही है यार, अब आगे बात बढ़ाने के लिए मेने अपना शार्ट इंट्रो दिया,
में : बाय ध वे मेरा नाम वीर है। वीर सिंह हाल में दिल्ही में रहकर अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा हु। ओर आप..?
तुम्हारी संजु : में लखनव से हु ओर आजकल कुछ नही करती..
में : कुछ नही मतलब.. ( में कुछ समजा नही इसीलिए मेने उससे पूछा)
तुम्हारी संजु : बेकार सी हु , पढ़ाई तो कबकी खतम हो गई अब बस घर पर बैठकर दिनभर फेसबुक पर टाइमपास करती हु।
में : ओह तो मेरे जैसे लोग आपके लिए टाइमपास करने का एक जरिया है यही ना..?
तुम्हारी संजु : मेने ऐसा कब कहा।
में : मुजे तो ऐसा ही लगता है। फिर बात को टालते हुवे मेने कहा, खेर छोड़ो सीरियसली बतावो ना आप क्या करती हो।
इसबार तो उसने कुछ अलग ही जवाब दिया, ऐसा की सुनने में भी अजीब लगे।
तुम्हारी संजु : सीरियसली कहु तो मेरा तो एक ही काम है। लोगो को डराना।
उसकी बात मुझे काफी अजीब लगी,
में : ये कैसा काम कोई चुड़ैल हो क्या..?
उसने तीन स्माइली वाले इमोजीस सेंड किये मतलब मेरी बातो को उसने मजाक में ली।
तुम्हारी संजु : नही में कोई चुड़ैल तो नही पर मेरा चहेरा ही ऐसा है की लोग देखकर ही डर जाते है।
उसकी इस बात से में थोड़ा घबरा गया।
में : तुम मज़ाक कर रही हो ना..? में कब आप में से तुम पर आ गया मुझे भी पता न चला।
तुम्हारी संजु : नही यार में सीरियसली कहे रही हु।
में : अगर ऐसा है तो अपनी कोई पिक दिखावो में तुम्हे थोड़ा देखना चाहता हु।
उसने फिर तीन स्माइली इमोजीस सेंड किये।
तुम्हारी संजु : थोड़ा क्यु पूरी देख ले। रुको में तुम्हे विडियोकोल करती हु।
मेरे लेपटॉप पर उसका वीडियोकोल आया, मेने कोल रिसीव किया तो स्क्रीन पर सामने हल्का सा अंधेरा छाया उसका एकदम खाली रूम था। वो आसपास कही नजर ही नही आ रही थी। उसे स्क्रीन पर बुलाने के लिए मेने उसे आवाज दी।
में : हेल्लो, हेल्लो कहा हो तुम..
रूम की वो खामोशी देखकर मुझे सच में डर लगने लगा। वो कही दिख भी नही रही थी। कही वो सच में कोई चुड़ैल..
मेरी घबराहट दूर करने के लिए मेने अपने आप को ही कहा,
वीर, इतने भी फट्टू मत बनो अरे फेसबुक पर चुड़ैल कैसे होगी।
में : हेल्लो संजु , कहा हो तुम.. प्लीज़ सामने आवो मुझे तुमसे बात करनी है।
अचानक ही एक काले बंदर का एकदम डरानेवाला खतरनाक मास्क पहनकर वो मेरे सामने आ गई ओर उसने जोर से मेरी ओर हाव किया,
इसबार में काफी हद तक डर गया। मानो मेरे तो पसीने छूट गए। मुजे देखेते ही वो हसने लगी,
वो : अरे डरो नही वीर में हु संजु..
में : यार तुमने तो मुझे वाइक डरा ही दिया.. उतारो ये बंदर सा मुह..
वो जोर से हँसने लगी।
वो : तुम ना सिर्फ नाम के ही वीर हो.. बाकी इतने फट्टू हो की एक बंदर से डर गए। है भगवान क्या हो गया है आजकल के लड़को को.. इतना तो हम लडकिया भी नही डरती।
फिर उसने अपना वो बंदरवाला मास्क चेहरे से हटाया ओर में मानो उसके उस हसीन खूबसूरत चेहरे को बस देखते ही रह गया.. वो कोई चेहरा था या फिर किसी शिल्पकार की बेहद सुंदर कलाकृति का अप्रितम नमूना, सुंदर काली आंखे, परफेक्ट नाक, ओर उसमे ओर मनमोहक लगती एक छोटी सी नोजरिंग, गुलाब की पंखुड़ियों जैसे कोमल होठ, ओर उसकी हँसी, जब वो हँसती थी उसके गालो पर खूबसूरत डिंपल्स बनते थे।
मानो में तो उसके उस खबसूरत चहेरे को निहारने में उसे एकपल देखने में खो गया। कुछ गहरा सा जादू था उस चेहरे में की देखनेवाला उसमे दुब ही जाता था।
तुम्हारी संजु : अब बोलो कैसी लग रही हु में..?
वो कुछ कह रही थी पर में.. में तो मानो उसकी खूबसूरती के ख्यालो से अभी बाहर ही नही आया था। उसने फिर जोर से कहा,
तुम्हारी संजु : बोलो ना केसी लग रही हु।
पर इस बार भी में उसे वैसे ही घूरता रहा.. उसको इस बात से गुस्सा आया,
तुम्हारी संजु : तांकना छोड़ो ओर बोलो केसी लग रही हु।
उसका मुझपर यू अचानक गुस्से में चिल्लाना, ओर डर के मारे मेरा लेपटॉप बंध कर देना..
उसे देखते ही पता नही मुझे क्या हो गया था। क्यु मुझे उसका वो चेहरा कुछ जाना पहचाना अपना सा लगा, उसे देखते ही मानो ऐसा लगा की ये चेहरा मेने पहले भी कही देखा है। शायद ख्वाबो में ही..
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क्रमशः

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