वीर ओर जिया दोनो स्कूल के समय के पक्के दोस्त, पर कॉलेज में आते ही मानो दोनो एक दूसरे से अलग हो गए। जिया ने पापा की महत्वकांक्षाओ को पूर्ण करने हेतु मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया। जब की वीर को पहले से ही परफोर्मिंग आर्ट्स में रुचि थी। इसीलिए वो आर्ट्स कॉलेज में गया। फिर भी उनदोनो की दोस्ती वैसी की वैसी ही रही।
दोनो पूरा दिन मोबाइल पर एकदूसरे से चेटिंग करते। वीडियो कोल पर बाते करते, एकदूसरे से रूठते, एकदूसरे को मनाते, एक दूसरे को हँसाते, मानो एकदूसरे के लिए ही जीते, वीक में एकबार मिलकर दोनो एकदूसरे को काफी वक़्त भी देते।
वीर को ओर उसकी मम्मी, ज्योती को जिया बहोत पसंद थी। जयोति ने तो जिया को अपने घर की बहु भी मान लिया था। तब से जब से उसने जिया को पहेलीबार पंद्रह साल की उम्र में स्कूल में अपने बेटे वीर के साथ देखा था।
दूसरी तरफ जिया के दिल में भी वीर के प्रति विशेष जगह थी जहा वो वीर के अलावा किसी ओर के बारे में सोच भी नही शकती थी।
संडे के दिन सुबह से ही दोनो पूरा दिन साथ में बाइक पर घूमे, थिएटर में मूवी इंजॉय की, साथ में बैठकर कॉफी पी। ओर रात में वीर ने ही उसे उसके घर छोड़ा।
***
रात का डीनर खतम कर के बालकनी में बैठते ही जिया ने वीर को कोल किया,
वीर : हाय जिया,
हमेशा की तरह जिया ने उससे पूछा,
जिया : आये हीरो क्या कर रहे थे ?
वीर : कुछ खास नही जय के साथ पब्जी खेल रहा था।
जिया ने शिकायत करते हुए,
जिया : तुम अब भी पब्जी खेलना नही भूले..
वीर : नही यार, पब्जी मेरी फेवरिट है। वैसी भी तू भी तो टिकटोक बनाती रहती है। मेने तुजसे कुछ कहा क्या..?
जिया : वो सब छोड़ो, चलो कोई गेम खेलते है।
वीर : गेम, अरे गेम से याद आया हमारी कल रातवाला ट्रुथ एन्ड डेर अभी अधूरा है। कहा थे हम..?
जिया ने उसे याद दिलाया, ओर आखिर उनके बीच ट्रुथ एन्ड डेर की अच्छी खासी गेम चली,
जिया की बारी आई सो वीर ने उससे कहा,
वीर : जिया, अब तुम्हारी बारी बोल क्या लोगी..?
जिया : मेरा ट्रुथ..
वीर : तो तुम्हारा ट्रुथ ये है की क्या तुम्हारे दिल में मेरे अलावा ओर भी कोई है..?
जिया ने हँसते हुए,
जिया : हा, है ना
एक पल तो मानो वीर का दिल ही बैठ गया,
वीर : कोन..?
जिया : मेरी माँ ओर कोन,
वीर : ओह.. मुझे लगा की..
जिया : क्या.. क्या लगा तुम्हे.. बोलो..
वीर ने बात को टालते हुवे कहा,
वीर : कुछ नही जाने दो, में डेर लेता हु।
जिया : डेर, सोच लो मेरा दिया डेर तुम्हे बहोत महँगा पड़ शकता है।
वीर : (जोश में आते) हेय जिया, तुम वीर को चेलेंज कर रही हो। अरे वीर से बड़ा डेरिंगबाज़ कोई है ही नही।
जिया : (हँसते हुवे) ओह तो मिस्टर डेरिंगबाज़ आपका डेर ये है की,
जिया ने थोड़ा सोचा ओर फिर उसने वीर को एक छोटा सा सिंपल सा डेर दिया। वैसे तो ये सिंपल डेर सिर्फ उसके मन सिंपल था पर वीर...
ये डेर पूरा करते करते वीर की जान चली जाएगी ऐसी तो उसने कल्पना भी नही की थी।
जिया : तुम्हारा डेर ये है की, तुम्हे चलती बाइक से सेल्फी लेनी होगी ओर उसी पल उसे फेसबुक पर पोस्ट करके उसमे मूजे टेग करना होगा। वो भी कल सुबह ही कॉलेज जाते वक़्त.
जिया जानती थी की वीर पूरा फट्टू है। आज तो हा कहकर डेरिंगबाज़ की बड़ी बड़ी बाते करेगा पर जब डेर कंप्लीट करना होगा तब खुद ही हार के बैठ जाएगा। कहेगा, जिया ये अपने बस का नही है। वो हमेशा से ऐसा ही करता था। इसीलिए जिया उससे हमेशा जीत जाती थी। इसबार भी उसने यही सोच के थोड़ा रिस्की डेर दे दिया। वैसे तो उसके मन ये जस्ट एक टाइमपास वाला खेल ही था। पर जिया को इम्प्रेस करने के लिए वीर ने भी ठान ली की चाहे मूजे जो करना पड़े पर कल सेल्फी अपलोड होगी। कल जिया के सामने हारूंगा तो नही।
वीर : ओके, में अपना डेर कम्प्लीट करूँगा। (उसकी बातो पर जिया को हँसी। आई। फिर भी उसने जैसे तैसे अपने हँसने पर कंट्रोल किया।) बोल अब तुम क्या लोगी ?
जिया : तुम्हारी तरह डेर,
वीर : तो तुम्हारा डेर ये है की कल के दिन तुम्हे मेरे लिए रोना होगा।
जिया ने शिकायत करते हुवे कहा,
जिया : पागल अपनी बेस्टफ्रेंड को रुलाएगा..?
वीर : (मुस्कुराते हुवे) अरे डेर है रोना तो होगा ही,
जिया : ओके, रो लुंगी इसमें क्या है।
***
अगले दिन वीरने अपना डेर कम्प्लीट नही किया, वो जिया के सामने हार गया। हरबार वो हारता ओर उसकी हार का ही फायदा उठाती जिया हरबार उससे ट्रीट लेती।
अपने लिए नही पर कॉलेज के आसपास रहते गरीब बच्चों के लिए, वीर के खर्च से जिया उन गरीब बच्चों को होटल में अच्छा खाना खिलाती।
वैसे तो एक तरफ जिया की ये बात वीर को बहुत अच्छी लगती पर दूसरी ओर वीर का मेलईगो उसे हराबार कहेता,
कैसा आदमी है तु..? हराबार एक औरत से हार जाता है। अगर यही चलता रहा तो जिया तुम्हे लूज़र मानकर छोड़कर चली जाएगी।
इसीलिए वो जिया के सामने जितने की पूरी कोशिश करता, पर जिया बहुत ही स्मार्ट थी वो वीर को जितने का एक भी मौका नही देती।
आज भी वो हार गया, इसीलिए उसे अपने पैसों से उन गरीब बच्चों को ट्रीट देनी पड़ी।
जिया शहर की सबसे महेंगी होटल में कुछ गरीब बच्चों के साथ बैठकर उसे खाना खिला रही थी। उसी वक़्त वीर वहां से घर भाग आया।
घर आकर वो अपने बेडरूम में रहे बेड़े से शिशे के सामने गया की तभी मानो उसे अपने जैसी ही कोई आवाज आई।
''कैसा आदमी है तु.. आज फिर एक औरत से हार गया..? वो आवाज सुनते ही वो एकदम से डर गया। पीछे मुड़कर देखा तो बेड पर लाल शर्ट में उसके जैसा ही एक आदमी बैठा बैठा उसकी बेबसी पर हँस रहा था।
उसे चुप कराते हुवे उसने जोर से कहा,
''नही में किसी से नही हारा..'
की तभी उसके सामने रखे सोफा पर उसने अपने जैसा ही एक दूसरा आदमी देखा जिसने सफेद रंग की टीशर्ट पहनी थी। उसने वीर के सामने बेठेते हुवे हुवे प्यार से कहा,
'' वीर तुम हार जाते हो ये तुम्हारी कमजोरी नही ताकत है। ये सोचो की तुम्हारी के कारण वो ग़रीब बच्चे एकदिन अच्छा खाना खा पाते है।
बेड पर बैठे लाल शर्टवाले ने उसे अपनी बातो में लुभाते हुवे कहा,
''नही वीर, तुम अगर ऐसे ही जिया से हारते रहे तो.. तेरी जिया तुम्हे कभी नही मिलेगी.. वो तुम्हे छोड़कर चली जाएगी।
सोफा पर बैठे सफेद टीशर्टवाले ने उससे कहा,
''नही वीर तुम मेरी बात मानो जिया तुम्हे..
उसकी बात को बीच में कापते हुवे लाल शर्टवाले ने कहा,
''वीर, तुम कमजोर नही हो तुम बस मेरी बात सुनो..
अपनी अपनी बात मनवाने के लिए वो दोनो एक साथ बोलने लगे वीर का सर चकराने लगा उसे लगा मानो वो पागल हो जाएगा, उसने जोर से चिल्लाते हुवे कहा,
''बस,'' ओर उसी पल कमरे में एकदम से सबकुछ पहले की तरह नॉर्मल सा हो गया। उसने पीछे मुड़कर देखा तो वीर की तरह दिखनेवाले वो दोनो कही गायब ही हो गए।
अचानक ही उसे जिया की आवाज सुनाई दी। वो आवाज आईने में से आ रही थी। वो आईने की ओर मुड़ा।
जिया उससे ही कह रही थी।
''वीर, तुम कभी नही बदलोगे ना.. लूज़र कही के.. तुम्हारे जैसे लूज़र संग में अपनी जिंदगी क्यु काटू बोलो..?''
इतना सुनते ही मानो उसकी आंखे गुस्से से लाल हुई। उसने वैसे ही गुस्से में चिल्लाकर उस आईने पर एक मुक़ा मारा, एक ही पल में आईना काच काच होकर टूटकर बिखर गया ओर टूटे आईने की आवाज मात्र से उसकी आंख खुल गई।
ये सब तो एक सपना था। पर फिर भी उसके मन में एक डर सा बैठ गया उसे लगा की इस बार भी अगर मेने ये डेर नही कम्प्लीट किया तो जिया की नजर में लूज़र साबित हो जाऊंगा। कही वो मूजे छोड़कर चली गई तो..?
चाहे जो भी हो पर में अपना डेर कम्प्लीट कर के रहूंगा।
अपनी पल्सर बाइक लेकर वो एकदम फिल्मी हीरो की भाती निकल गया अपनी कॉलेज की ओर रास्ते में 80 की स्पीड से दौड़ती हुई उसकी बाइक तेज़ रफ्तार से अपनी कॉलेज की ओर आगे बढ़ ही रही थी। की तभी उसे जिया का दिया गया डेर याद आया।
''अरे मुझे तो जिया का दिया गया डेर कम्प्लीट कराना है।''
ओर उतनी ही रफ्तार से कॉलेज की ओर आगे बढ़ती बाइक पर ही उसने अपने आईफोन पर चलती ही हुई बाइक से सेल्फी क्लिक की,
#selfiWithChlatiBike,
डेर कम्प्लीट ऐसा लिख के उसने उसी पल फेसबुक पे सेल्फी पोस्ट की
***
सुबह दश बजे जिया एक हाथ मे कॉफी का कप लेकर नास्ते के टेबल पर बैठी। उसने पास पड़े रिमोट से टीवी न किया और कॉफी की एक चुसकी भरते हुवे उसने अपने मोबाइल में फेसबुक ओपन किया, टैगलाइन में सबसे पहले वीर की पोस्ट थी।
डेर कम्प्लीट,
#selfiWithChlatiBike,
जिसे देखकर एक पल तो डर के मारे मानो उसकी जान ही निकल गई।
उस पोस्ट को ध्यान से देखते ही उसके चहेरे पर मुस्कान छा गई।
''अरे वाह मेरे सेल्फीलवर आखिर डेर कम्प्लीट किया तूने..''
रिमोट से टीवी पर चेनल चेंज करते हुवे उसने वीर को कोल किया
आप जिस नंबर पर कोल कर रहे है। वो अभी स्विच ऑफ है। कृपया कुछ समय बाद फिर से प्रयास करे
''अरे ये गधा फोन क्यु नही उठा रहा..''
हल्के गुस्से में वैसे ही बकबक करते हुवे उसने टीवी की ओर देखा।
टीवी पर एक के बाद एक चेंज हो रही चेनल के बीच ही अचानक उसकी नजर एक न्यूज चेनल की हेडलाइन पर पड़ी।
''चलती बाइक पर सेल्फी लेना युवक को पड़ा भारी.. कॉलेज जा रहे युवक की बाइक अकस्मात में मोत''
इतना सुनते ही मानो उसके काँपते हाथो से टीवी का रिमोट छूट गया.. एक पल तो मानो वो वही फ्रिज सी हो गई। अगली ही पल उसने अपने आप को मनाने की कोशिश की,
''नही, ये मेरा वीर नही हो शकता.. वीर का तो आज घूमने का मन था। तो फिर वो कॉलेज क्यु जाएगा।
उसने मुजे खुद ही उसे दिन कहा था की,
वीर : इस मंडे कॉलेज जाने का बिल्कुल मन नही है, हम कही बहार घूमने चलेंगे ठीक है।
जिया : (उत्स्कता वश) घूमने बोलो कहा जाएंगे..?
वीर : वो तुम मुझपर छोड़ दो। यही दिल्ही में ही एक बढ़िया जगह है।
जिया : सरप्राइज मत बना बोल ना..!
वीर : मंडे पता चल जाएगा।
उसने फिर वीर को कोल किया इस बार भी उसका फोन स्विच ऑफ आ रहा था। उसके मनमे अब डर सा बैठ गया ऐसा कही सच में वीर को कुछ..
की अचानक उसके मोबाइल की रिंगटोन बजी उसने देखा तो वीर की मा ज्योति आंटी का फोन था।
जिया : हेल्लो ज्योतिआंटी वीर, कहा है। वो अपना फोन ही..
मीणा ; हमारा वीर अब कभी फोन नही उठाएगा जिया..
इतना बोलते ही ज्योति फूटफूटकर रोने लगी।
***
वीर के घर पर आंखों के सामने पड़े उसके बेजान शरीर से लिपटकर जिया मानो फुटफूटकर रोने लगी। उसने कभी सपने में भी नही सोचा था की उसका ये पल दो पल का खेल ट्रुथ एन्ड एक दिन उसकी जिंदगी, उसकी दुनिया, उसकी खुशियां, उसका सबकुछ छीन लेगा।
''तुम्हारा डेर ये है जिया की कल तुम्हे मेरे लिए रोना होगा''
वीर की यह बात याद आते ही, जिया ने ऊपर आश्मान की ओर देखा जोर से चिंख पड़ी,
"वी...र.."
ध एन्ड
दोस्तो, ये कहानी आपको केसी लगी इस बारे में अपनी राय लिखकर जरूर भेजे, ऐसी ही दिलचस्प कहानियां पढ़ने के लिए आज ही मुझे प्रतिलिपि हिंदी पर फॉलो कीजिए,
आप अपनी निजी राय मुझे वॉट्सऐप कर शकते है, मेरा वॉट्सऐप नंबर है 7383155936

0 Comments