वीर एन्ड सोनाली मानो मेड फ़ॉर इच अधर दोनों एकदूसरे को बहोत चाहते थे। और इसीलिए पूरी कॉलेज उन्हें रोमियो जूलिएट के नाम से जानती थी। 
        आर डी कॉलेज में F.Y. से लेकर T.Y. तक उनका प्यार वैसा का वैसा ही रहा पर जैसे ही T.Y. खतम हुवा मानो उनके प्यार को किसीकी नजर लग गई।
        सोनाली के पापा जयदेवभाई ने अपनी बेटी के लिए उसके जैसा ही एक एज्युकेटेड़ लड़का ढूंढ लिया। वो लड़का दक्ष जब उसे देखने आया तब उसने पापा की खुशी के खातिर ही शादी के लिए हा कर दी। पर वो वीर को चाहती थी। आखिर वीर ही तो उसके लिए सबकुछ था।
        उसने तुरन्त ही वीर को घर के नजदीकी एक कॉफिशोप मे मिलने बुलाया। वैसे तो वीर सोनाली से काफी नाराज था क्योंकि पिछले एक हप्ते से वो उसे काफी इग्नोर कर रही थी। बार बार फोन काट देती एक भी मेसेजिस का रिप्लाय नही देती ओर आज अचानक मिलने बुलाया इसीलिए अपना सारा काम छोड़कर वो उसे मिलने कॉफिशोप की ओर निकल पड़ा।
               * * *
      एक धंटे बाद दोनों एक कॉफिशोप के कोनेवाले टेबल पर आमने सामने बैठे थे। इतने दिनों बाद मिले इसीलिए पिछले दिनों की सारी नाराजगीयां भूलकर वीर ने प्यार से उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया। उसी पल सोनाली ने अपना हाथ खीच लिया। ओर कहा।
        ''वीर ये हमारी आखरी मुलाकात है। आज के बाद हम कभी नही मिलेंगे।''
        अचानक ही सोनाली को ये क्या हो गया वो ऐसा क्यु कह रही है।
       ''पर सोनाली हुवा क्या है? क्यु हम नही मिलेंगे ? क्या वजह..''
       सोनाली ने उसे सारी बाते बताई और उसकी बात सुनकर वीर को बहोत गुस्सा आया।
       ''तुमने हा कर दी। क्यु..? क्या तुम मूझसे प्यार नही करती..?''
        सोनाली की आंखे भर आईं
        ''में तुमसे बहोत प्यार करती हूं वीर पर..''
        ''समझ गया सब समझ गया ये सब तुम्हारे मम्मी पापा की वजह से हो रहा है। अब तो एक ही रास्ता है। चल भाग चलते है।''
       ''भाग चलते है। वीर तुम पागल हो अरे अपनी फेमेलिस के बारे में तो सोचो''
       ''सोनाली बात को समजो वो लोग हमारे प्यार को कभी नही अपनाएंगे। में तो कहता हूं उनसबको छोड़कर भाग चलते है कही.. हम नई दुनिया बसायेंगे अपनी दुनिया।''
       उसने कभी सपने में भी नही सोचा था की उसका वीर ये सब कहेगा। आँसु पोछते हुवे उसने कहा
       ''सुनो वीर में तुम्हे छोड़ सकती हूं पर अपने परिवार को नही।''
       उसकी इस बात पर वीर को बहोत गुस्सा आया ओर गुस्से में ही उसने उसे काफी कुछ सुना दिया।
        ''वाह मुझे छोड़ दोगी.. तो ठीक है छोड़ दो मुझे.. भुल  जावो अपने तीन साल के प्यार को ओर कर लो अपने पापा की पसंद से शादी.. फिर तुम भी खुश ओर में भी..
       सोनाली मुझे नही पता था की तुम मेरे साथ ऐसी बेवफाई करोगी।''
       ओर इतना कहकर वो उस टेबल से उठकर सोनाली की जिंदगी से चला गया। शायद हमेशा के लिए।
               * * *
      एक महीने बाद सोनाली की दक्ष के साथ शादी हो गई और कुछ समय बाद वीर की भी कोमल नामकी एक लड़की से शादी हो गई। घर में आते ही कोमल ने वीर का मन पढ़ लिया। ओर इसीलिए वीर ने अपने पहले प्यार के बारे में उसे सबकुछ बता दिया।
         ''कोमल, सोनाली ने मुझसे बेवफाई की। अपने माँ बाप के लिए उसने मेरे तीन साल के प्यार को छोड़ दिया। ओर उसके माँ बाप भी बेटी के मन मे कोन बसा है ये जाने बगैर ही उसकी शादी कही और कर दी।''
         वीर की बात सुनकर कोमल हँसी उसने कहा।
         ''वीर तुम्हे लगता है की वो बेवफा है। उसने तुम्हारे साथ बेवफाई की। पर सच कहु तो वो बेवफा नही है। ओर वैसे भी अगर सोनाली की जगह में होती तो में भी वही करती जो उसने किया। वो बेवफा नही है ए बात तुम्हे आज नही पर एक दिन समजोगे जरूर। ओर जीस दिन समझ जावोगे ना तुम्हे सोनाली के इस फैसले पर नाज़ होगा।''
     कोमल की वो बात मुझे आज बाइस साल बाद समझ आई। जब मैने अपनी लाडली नव्या को अपने प्रेमी जय के साथ देखा। जब मेने उनलोगों की बातचीत सुनी।
               * * *
     मेरे एक दोस्त का छोटा बेटा धवल जो लंदन से पढ़ाई कर के हाल भारत आया था। उसीके साथ मेने अपनी बेटी नव्या की शादी तैय कर दी। नव्या ने भी रिस्ते के लिए हा कर दी। इसीलिए सबकुछ जल्दी जल्दी हो गया शादी की तारीख भी निकल आई बिस दिन बाद शादी थी। तो हमसब उन्ही की तैयारियो में लगे थे।
       सुबह दश बजे नव्या तैयार होकर निकल गई। कोमल ने पूछा तो बताया अपनी फ्रेंड खुशी को मिलने जा रही हु। दो घण्टे में आ जाउंगी।
       उसके निकलने के बाद पता चला की जल्दबाजी में वो अपना पर्स ओर मोबाइल तो डायनिंग टेबल पर ही भूल गई।
       कोमल चिंतित हुई
       ''वीर, नव्या अपना पर्स ओर मोबाइल घर पर ही भूल गई। आप जरा जाकर उसे दे आइए ना।''
        उसीका पर्स ओर मोबाइल लेकर में उसे ढूंढने के लिए निकल गया। रास्ते में मैने उसकी फ्रेंड खुशी को कॉल किया उसने बताया की वो आज अपने प्रेमी जय से आखरीबार मिलने काफे कल्चर जानेवाली थी।
        इस बारे में तो उसने आजतक मुझसे कभी कुछ नही कहा ओर शायद कोमल को भी इस बारे में कोई जानकारी नही होगी।  वरना वो मुझे जरूर बताती।
        में फ़ौरन काफे कल्चर पहोचा। ये वही कॉफिशोप था जहाँ बाइस साल पहले में सोनाली से आखरी बार मिला था।
       अंदर जाकर देखा तो उसी कोनेवाली टेबल पर जहां एकदिन में ओर सोनाली बैठे थे वहां आज नव्या अपने प्रेमी जय के साथ बैठी थी। वो मुझे देख ले उसे पहले ही में वही दरवाजे के पीछे छुप गया जहां से मैने उनके बीच की बातचीत सुनी।
               * * *
नव्या : जय अब हम ना मिले तो ही बेटर होगा वैसे भी कुछ दिनों बाद मेरी शादी है।
जय : नव्या अपने मोम डेड से बात कर उनसे बोल की तु मुझसे प्यार करती है। शायद वो हमारे रिश्ते के लिए मान जाए।
नव्या : नही जय, मोम तो शायद मान भी जाए पर डेड.. वो नही मानेंगे।
जय : डेड नही मानेंगे तो क्या.. तुम मुझे छोड़ दोगी। अपने डेड की पसंद से ऐसे ही शादी कर लोगी।
नव्या : हा यार, मेरे पास ओर कोई रास्ता भी तो नही है।
जय : एक रास्ता है.. चल भागकर शादी कर लेते है। 
नव्या : नही जय, ये कैसी बात कर रहे हो.. मेरे मोम डेड के बारे में तो सोचो बेटी हु में उनकी ऐसे घर से भागकर में उनकी मर्जी के खिलाफ शादी नही कर शकती
जय : यार जब वो लोग तुम्हारे बारे में नही सोचते। उन्हें तुम्हारी कोई पड़ी ही नही है तो तुम क्यों उनकी फिकर करती हो छोड़ दो उन्हें अपने हाल पर ओर चलो..
नव्या : फिकर करते है जय.. उनलोगों के लिए में ही सबकुछ हु ओर रही बात छोड़ने की तो में तुम्हे छोड़ शकती हु पर उन्हें नही..
        इतना सुनते ही मेरी आँखें भर आईं। मुझे कोमल के शब्द आये।
        ''वीर तुम्हे लगता है की वो बेवफा है। उसने तुम्हारे साथ बेवफाई की। पर सच कहु तो वो बेवफा नही है। ओर वैसे भी अगर सोनाली की जगह में होती तो में भी वही करती जो उसने किया। वो बेवफा नही है ए बात तुम्हे आज नही पर एक दिन समजोगे जरूर। ओर जीस दिन समझ जावोगे ना तुम्हे सोनाली के इस फैसले पर नाज़ होगा।''
        ओर आज सच मे मुझे सोनाली ओर नव्या के इस फैसले पर नाज़ हुवा। अपने माँ बाप के लिए तो ये बेटियां खुशी खुशी अपने प्यार को भी कुरबान कर देती है। ओर मेरे जैसे लोग उनकी इस कुरबानी को बेवफाई समझ लेते है।
       उसी पल एक वेटर के हाथों उसका पर्स भिजवाकर में पहोच गया जय के घर उनके परिवार से अपनी बेटी का हाथ मांगने।
       ओर फिर पंद्रह दिन बाद ही मेने अपनी लाडली को जय के साथ विदा कर दिया। 
                     समाप्त
       ऐसी ही दिलचस्प कहानियां पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग को आज ही फॉलो कीजिए।
©Paresh Makwana